
जीने का हक तुमको है तो
जीने का हक उसको भी दो
जियो और जीने दो
बाघों को क्यों मारो ?
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जो जीव तुझमें है वही जीव उसमें भी
दोनों ही अंश हैं एक ही ईश्वर की
अपने लालच के खातिर, न लाद तू पाप गठरी
“जहां दया तहँ धर्म, जहां लोभ तहँ पाप” सीख, कुछ बातें तू ज्ञान की ।
जीने का हक तुमको है तो
जीने का हक उसको भी दो
जियो और जीने दो
बाघों को क्यों मारो ?
तू तो इंसान है और वो एक जानवर, बेजुबां(1)
तेरा दरजा उससे ऊँचा फिर भी काम करे तू नीचा
आत्मा को तू झंझोड़ दे, दिमाग को तू खँगाल दे
आत्मा का दूसरा रूप 'दया'_है, क्या वाकई तू जिन्दा है ?
जीने का हक तुमको है तो
जीने का हक उसको भी दो
जियो और जीने दो
बाघों को क्यों मारो ?
अक्ल को किस खूँटे पे है टांगा
क्या तूने आत्मा को है बेच खाया
आत्मा से जो निकली हाय वो कभी ना टल पाय
मत ले बेजुबां(1) की तू हाय, आत्मा सो परमात्मा पुरानी ये कहावताय(2) ।
जीने का हक तुमको है तो
जीने का हक उसको भी दो
जियो और जीने दो
बाघों को क्यों मारो ?
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(1) जो, तुम्हारी भाषा में न बोल पाए
(2) वर्षों से जो कहावत कहती चली आये




